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परीक्षा भवन का दृशय


विषय परिचय : 

परीक्षा एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमे व्यक्ति की योग्यता पता चलती है, की व्यक्ति सिखाये गए ज्ञान को कितना ध्यान में रखता है और उसका उपयोग समस्या सुलझाने के लिए कैसे करता है | किसी भी इंसान को अपनी काबिलियत को जानने के लिए परीक्षा को देना जरुरी हैं | परीक्षा आत्मपरीक्षण का काम करती है |    

विस्तार :

आज के समय में परीक्षा को देने के लिए परीक्षा भवन का निर्माण किया जाता है | जहाँ सभी छात्र मिलकर आते है और अपनी परीक्षा देते है | यह एक कालविधि है जिसमे बच्चों के मन में काफी डर निर्माण होता है | छात्रों के मन में काफी प्रकार के विचार उत्पन्न होते है , की हमारा क्या होगा ? हम पास तो हो जाएंगे ना ? इस स्तिथि के कारण जो उन्होंने पढ़ा था वह भी वह भूल जाते है |  

बच्चे सोचते है की मार्च और अप्रैल का महीना आखिर क्यों आता है ? यह महीने के नाम सुनते ही बच्चे  टेंशन में आते है | परीक्षा के कुछ दिन से पहले से ही पढ़ने को शुरुआत करना मनो बच्चों की आदत सी हो गयी हो | यह एक ऐसा समय है जहा पर बच्चा पूरे सालभर की पढ़ाई कुछ हफ्तों में पूरी कर देता हैं | इस स्तिथि में वह हर बात को अच्छे से समझ कर पूरी तरह से लिखने के लिए सक्षम होते है | 

परीक्षा भवन में बच्चों के मन में एक डर बैठा रहता है की अब पेपर कैसा आयेगा, में पास तो हो जाऊंगा गए ना अद्दी | पेपर के समय सुपरवाइजर  जैसे हमारी सातों जन्मो की दुश्मनी एक ही समय में निकलता हो हर किसी पर इतनी तेज़ नजर रखते है की कोइ भी उनकी आँखो नहीं बच सकता | पेपर के समय बार बार टाइम बताकर बचो को डरना आदि काम वह बड़ी निपूर्णता के साथ करते है |   

परीक्षा भवन का दृशय :

परीक्षा भवन में बेंचेस की स्तिति एक खास प्रकार से सेट की जाती हैं | एक बेंच में काम से काम डेड हात का अंतर तो होता ही हैं | हमारे साथ दूसरी औऱ कक्षा के छात्र भी बैठते है | जिसके चलते कोइ भी छात्र किसी भी पेपर कॉपी न कर सके | सुपरवाइजर मनो पूरे साल का बदला लेने की कोशिश में होते हैं के कब मुझे कोइ मिले और में उसे दतु याह मारु | 

 


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