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गरीबी।

 प्रस्तावना :


गरीबी यानी किसी चीज की कमी या उसका अभाव होना है। हर मनुष्य की दृष्टि से गरीबी का अर्थ अलग-अलग  होता है। लेकिन आज के वर्तमान समय के हिसाब से  लोगो का गरीबी के संबंध में एकमात्र प्रमुख अर्थ यह है कि पैसों की कमी यानी गरीबी होती है। आज किसी भी चीज को प्राप्त करने के लिए पैसों की सख्त जरूरत है। आज हमारे समाज में यही सोच है जिसके कारण देश की प्रगति होना मुश्किल है।

विस्तार :

गरीबी यह हमारा जन्म भर का श्राप है यह कहना बिल्कुल उचित है क्योंकि किसी भी प्रकार की प्रगति करनी हो तो उसके लिए यह आवश्यक है कि वह की गराबी को खत्म किया जाए । यह एक ऐसी समस्या है जो आज पूरे विश्व में दिखाई देती है । अनेक देश लिए करोड़ों रुपए खर्च कर चुके है लेकिन फिर भी आज भी यह समस्या बिल्कुल वैसी की वैसी मौजूद है।

गरीबी कि वजह:

गरीबी  का सबसे महत्वपूर्ण कारण है,  मनुष्य की असंतुष्टता है।  जगतिक बैंक के हिसाब से अब जो मनुष्य स्वतंत्रता, मनोरंजन, गाड़ी आदि चीजों से वंचित है वह गरीब है। मनुष्य अधिक प्राप्ति के आभाव में आकर जो कुछ अर्जित किया है उसे भी गवा देता हैं। मन में नकारात्मक विचारों का निर्माण होना हमारे मन को कमजोर बना देता हैं। मनुष्य की ईर्षा ही उसे आगे बढ़ने से रोकती है। यदि हमारा अच्छा नहीं होता तो हम दूसरो का क्यों होने दे। इस प्रकार के विचार मन में उत्पन्न होते है जिस कारण मनुष्य को अच्छे आदर्श और विचारों की गरीबी है।


गरीबी के प्रकोप :

चोरी, खून आदि जैसी गुन्हेगारी का बढ़ना इनमें गरीबी की समस्या का भी  हात है। आज बदलते समय के साथ लोग सिर्फ पैसे से नहीं बल्कि अपने आदर्शों और सोच से भी गरीब होते जा रहे हैं। पैसों के लिए अपने ही घर में चोरी करना यह सोच की गरीबी है। 

अलास भी गरीबी का एक सबसे बड़ा कारण हैं। लोग काम मेहनत करके ज्य दा से ज्यादा फायदा उठाना चाहते है । इसी कारण से गरीबी को और बढ़ावा मिल रहा है।

उपया :

गरीबी को यदि जड़ से खत्म करना हो तो हमें अपने अंदर अच्छे आदर्श और विचारों को धारण करना चाहिए ताकि किसी भी प्रकार की गरीबी हमें परेशान ना करे। हर परिस्थिती को उत्पन्न करने वाले हमलोग ही है और हम में इस पर विजय हासिल करने की ताकत भी दी है बस जरूरत है तो आदर्श और एक अच्छे सोच कि।

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