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परिवार ( एकता की ताकत ) पर निबंध

प्रस्तावना:

एक ऐसा लोगो का समूह जो आपस में रिश्तेदार होते है और एक दूसरे का सुख- दुःख आपस में बांटते है। प्राचीन काल से मनुष्य किसी न किसी बंधन में बंधा है और वह सबसे ज्यादा बंधा है पारिवारिक बंधन में, यह खून का रिश्ता होता हैं। इस बंधन को निभाना उसका परम कर्तव्य है | वह जैसा घर वालो के साथ रहेगा, वैसे ही बाहर वालो के साथ | 


विस्तार:

 परिवार में रिश्ते निभाना बहुत मायने रखता हैं। थोड़ी सी छोटी गलती के कारण परिवार का नाम मिट्टी में मिल सकता हैं। यहा फिर परिवार टूट सकता है। बड़े लोगो पर परिवार को संभालने की जिम्मेदरियां होती हैं। घर में कोई समस्या हो तो उसका समाधान भी उन्हीं को निकाल ना होता है | परिवार को चलाना हो तो उसे एक दूसरे को समझ कर, सबके एक मत लेकर चलता है | 

परिवार के मुख्य सदस्य होते है दादा- दादी, माता- पिता, भाई -बहन, चाचा- चाची आदि। परिवार के सिर्फ घरवाले नहीं आते कुछ होते है मित्र परिवार जहा सारे दोस्त मौजूद होते है | परिवार प्रत्येक मानव के जीवन का एक बड़ा और महत्वपूर्ण हिस्सा है। हर इंसान, पशु, पक्षी अपने परिवार के बिना अधूरा है। मनुष्य जीवन में परिवार एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। परिवार एक वृक्ष की तरह होता है जिस में कई तने होते हैं। 

परिवार के जड़े हमारे माता-पिता होते है, पेड़ की टहनिया मतलब हमारे भाई-बहिन | अगर टहनिया टूट जाये तो पेड़ सूखा होता है लकिन जिन्दा रहता है | पर अगर उसकी जड़े ही टूट जाये तो पेड़ जगह पर मर जाता है | हम भी हमारे जड़ अर्थात हमारे माता- पिता पर निर्भर है | उनके बिना हमारा कोई अस्तित्व नहीं है | 

अगर परिवार के सदस्यों का हम पर भरोसा हो तो ही बाहेर वालो का हम पर होता हैं | वर्णा वह कहते है की घरवाले ही उस पर भरोसा नहीं करते, वह उन्हे धोका देता है, तो हम क्यों करे | ऐसे ही हमारा और हमारे परिवार का समाझ में नाम बदनाम होता है | 

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